रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य के समग्र और सतत विकास के लिए पारंपरिक ज्ञान तथा आधुनिक तकनीक का समन्वय बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आदिवासी समुदायों का पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक संसाधन राज्य की सबसे बड़ी ताकत हैं। यदि इन्हें आधुनिक विज्ञान, अनुसंधान और नई तकनीकों के साथ जोड़ा जाए तो झारखंड न केवल विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकता है, बल्कि पूरे देश के लिए भी एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
मुख्यमंत्री ने रांची में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड की पहचान केवल खनिज संपदा से नहीं, बल्कि यहां के लोगों की संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध से भी है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के पारंपरिक ज्ञान में जल संरक्षण, जैव विविधता, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण के कई ऐसे तरीके मौजूद हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं। इन पारंपरिक तरीकों को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन लाया जा सकता है।
हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को डिजिटल तकनीक, कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने के लिए कई योजनाएं चला रही है। उनका उद्देश्य झारखंड के युवाओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से लैस करना है, ताकि वे राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। उन्होंने कहा कि तकनीक केवल विकास का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सशक्त बनाने का भी एक प्रभावी उपकरण है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर दिया जोर।
- आदिवासी समाज के ज्ञान को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही।
- युवाओं के लिए कौशल विकास और डिजिटल शिक्षा को बताया प्राथमिकता।
- कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग में तकनीक के उपयोग पर विशेष बल।
- पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को सरकार की प्राथमिकता बताया।
- झारखंड को आत्मनिर्भर, नवाचार आधारित और विकसित राज्य बनाने का संकल्प दोहराया।
रांची में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा— स्थानीय ज्ञान, प्राकृतिक संसाधन और आधुनिक तकनीक के समन्वय से झारखंड बनेगा विकास का मॉडल।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसी विकास नीति पर काम कर रही है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय और आर्थिक प्रगति तीनों को समान महत्व दिया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास की दौड़ में स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। झारखंड का विकास तभी संभव है जब यहां के लोगों की भागीदारी और उनके ज्ञान को सम्मान मिले।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और डिजिटल सेवाओं में नई तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाएगा, ताकि आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंच सके। साथ ही, स्टार्टअप, नवाचार और अनुसंधान को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा हों और आर्थिक गतिविधियों को गति मिले।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संतुलित उपयोग झारखंड को आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करें और आधुनिक तकनीक को अपनाकर राज्य और देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
