नई दिल्ली। भारत की BRICS अध्यक्षता के बीच ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल ऑफ इंडिया (GTTCI) ने नई दिल्ली में ‘भारत और BRICS+ आर्थिक संबंध संवाद’ का आयोजन किया। आगामी BRICS शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित इस कार्यक्रम में राजनयिकों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिनिधियों, कारोबारी जगत, GTTCI सदस्यों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। संवाद का केंद्र व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और भविष्य की आर्थिक साझेदारियों को मजबूत करने पर रहा।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने BRICS+ के बदलते स्वरूप और वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसकी बढ़ती भूमिका पर चर्चा की। संवाद के जरिए यह समझने की कोशिश की गई कि BRICS देशों और साझेदार देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को किस तरह व्यावहारिक व्यापारिक अवसरों और निवेश साझेदारियों में बदला जा सकता है।
11 सदस्य और 10 साझेदार देशों का मंच
अपने स्वागत संबोधन में GTTCI के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने BRICS के विस्तार और इसके बढ़ते वैश्विक प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्वरूप में BRICS 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उनके अनुसार व्यापार, लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता ऐसे प्रमुख आधार हैं, जिनके जरिए BRICS+ के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाया जा सकता है।

डॉ. गुप्ता ने इस बात पर भी जोर दिया कि राजनयिक संवाद को केवल चर्चा तक सीमित रखने के बजाय उसे निवेश, तकनीकी सहयोग और कारोबार के ठोस अवसरों में बदलने की जरूरत है।
कई देशों के राजनयिकों ने लिया हिस्सा
संवाद में मिस्र, इरिट्रिया, मॉरिटानिया और चीन के राजनयिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चीन के दूतावास के काउंसलर सोंग बो भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। इसके अलावा इथियोपिया और जर्मनी सहित विभिन्न देशों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
कार्यक्रम में भारत सरकार की पूर्व विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने मुख्य संबोधन दिया। उन्होंने भारतीय पारंपरिक खाद्य प्रणाली और ‘थाली’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए खाद्य सुरक्षा और पोषण से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में भारतीय दृष्टिकोण की उपयोगिता पर बात रखी।
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भारत-ब्राजील कृषि सहयोग पर भी चर्चा
भारत में ब्राजील दूतावास के एग्रीकल्चरल अताशे रॉबर्टो कार्लोस पापा ने कृषि और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने की संभावनाओं पर अपने विचार रखे। चर्चा में भारत और ब्राजील के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने तथा दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नए क्षेत्रों तक ले जाने की संभावनाओं पर जोर दिया गया।
GTTCI के सलाहकार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य राजदूत डॉ. ज्ञानेश्वर एम. मुले ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक समुदाय को एक मंच पर लाने के प्रयासों की सराहना की।
रूस के साथ व्यापारिक रिश्तों पर भी फोकस
कार्यक्रम में रूस के डिप्टी ट्रेड कमिश्नर एवगेनी ग्रिवा ने ‘Doing Business in India’ विषय पर प्रस्तुति दी। इसमें भारत के कारोबारी माहौल और यहां उपलब्ध व्यापारिक संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के सामने बेहतर तरीके से रखने पर चर्चा हुई।
भारत-रूस व्यापारिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए GTTCI के निदेशक शुभम गुप्ता ने आगामी INNOPROM इंटरनेशनल बिजनेस एक्सपो में ‘Made in Russia Pavilion’ की जानकारी भी साझा की। यह एक्सपो 9 और 10 सितंबर को आयोजित होना है, जहां रूसी कंपनियों और टेक्नोलॉजी संस्थानों को भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय कारोबारी प्रतिनिधियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम में GTTCI सदस्यों और अन्य आमंत्रित प्रतिभागियों ने भी चर्चा में सक्रिय भागीदारी की। समापन सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि सरकारों, राजनयिक मिशनों, कारोबारी संस्थानों और उद्योग जगत के बीच निरंतर संवाद से ही व्यापार, निवेश और टेक्नोलॉजी सहयोग के लिए ठोस रास्ते तैयार किए जा सकते हैं।
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