नई दिल्ली। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल इंडिया (GTTCI) ने राजधानी दिल्ली में विशेष ‘India@80’ समारोह का आयोजन किया। एरेनेस हाउस स्थित GTTCI सचिवालय में आयोजित इस कार्यक्रम में भारत की स्वतंत्रता यात्रा, आर्थिक प्रगति, तकनीकी उपलब्धियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते प्रभाव पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में राजनयिकों, सरकारी अधिकारियों, उद्योग प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसे वैश्विक स्वरूप प्रदान किया।
समारोह का मुख्य उद्देश्य बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की भूमिका और दुनिया के साथ उसके बढ़ते सहयोग पर चर्चा करना रहा। कार्यक्रम की थीम भारत को एक भरोसेमंद और मजबूत वैश्विक साझेदार के रूप में प्रस्तुत करने पर केंद्रित रही। आयोजन में राष्ट्रगान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, विशेषज्ञों के संबोधन, संवाद सत्र, वीडियो स्क्रीनिंग और सम्मान कार्यक्रमों के जरिए भारत की उपलब्धियों को सामने रखा गया।
वैश्विक सहयोग को मजबूत करने पर GTTCI का जोर
कार्यक्रम की शुरुआत में GTTCI के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक भूमिका केवल आर्थिक ताकत तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, तकनीक, संस्थागत सहयोग और लोगों के बीच संपर्क के माध्यम से भी देश दुनिया के साथ नए रिश्ते बना रहा है।
उन्होंने GTTCI के माध्यम से विभिन्न देशों के साथ व्यापारिक और संस्थागत संबंधों को आगे बढ़ाने तथा भारत की वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उनके अनुसार, भारत के बढ़ते प्रभाव को व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग में बदलना आने वाले समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

India@80: GTTCI Celebrates India’s Global Strength; Deliberations Held on ‘Viksit Bharat’ (Developed India)
डिजिटल क्रांति को भारत की बड़ी उपलब्धि बताया
राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने भारत की डिजिटल परिवर्तन यात्रा पर अपने विचार रखे। उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और विशेष रूप से UPI के विस्तार को भारत की तकनीकी क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि भारत ने स्वतंत्रता के बाद विकास के कई चरणों को पार किया है। आज देश केवल अपनी आर्थिक और तकनीकी जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि कई क्षेत्रों में दुनिया के लिए मॉडल और साझेदार बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने वैश्विक देशों के साथ पारस्परिक लाभ पर आधारित सहयोग को भारत की भविष्य की भूमिका के लिए महत्वपूर्ण बताया।
महिला नेतृत्व को विकास की नई दिशा
IAS अधिकारी डॉ. रश्मि सिंह ने भारत में महिलाओं की बदलती भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि महिलाओं से जुड़ी नीतियों का स्वरूप समय के साथ बदला है। महिलाओं के कल्याण से आगे बढ़कर सशक्तिकरण, विकास में भागीदारी और अब महिला नेतृत्व वाले विकास पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में महिलाओं की भागीदारी केवल योजनाओं का लाभ लेने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। महिलाओं को निर्णय लेने, नेतृत्व करने और विकास की दिशा तय करने में समान अवसर मिलना जरूरी है।
‘थैंक यू इंडिया’ प्रस्तुति ने बटोरी सराहना
कार्यक्रम में ‘थैंक यू इंडिया’ नाम से एक विशेष वीडियो भी प्रदर्शित किया गया। आश्मीन मुंजाल द्वारा प्रस्तुत इस वीडियो में भारत की विभिन्न उपलब्धियों और विश्व समुदाय पर उसके प्रभाव को दर्शाया गया।
वीडियो के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से भारत के ज्ञान, नवाचार, तकनीकी प्रगति और अन्य क्षेत्रों में योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया गया। प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों को भारत की वैश्विक भूमिका के अलग-अलग पहलुओं से परिचित कराया।
भारत-निकारागुआ सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा
भारत में निकारागुआ की राजदूत नाडेस्का इमारा कथबर्ट कार्लसन ने कार्यक्रम में भारत-निकारागुआ संबंधों पर संबोधन दिया। उन्होंने GTTCI की ओर से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और राजनयिक संपर्कों को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और विस्तार देने की संभावनाओं पर चर्चा की। उनके संबोधन में निकारागुआ की आर्थिक क्षमता और भारत के साथ भविष्य में सहयोग के संभावित क्षेत्रों को भी सामने रखा गया।
समावेशी विकास को बताया जरूरी
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उप निदेशक डॉ. आर. स्टालिन ने भारत की विकास प्रक्रिया में समान अवसर और सामाजिक समावेशन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब विकास का लाभ समाज के अलग-अलग वर्गों तक समान रूप से पहुंचे।
रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क विभाग के निदेशक (प्रशासन) डी. सलाई मारन ने राष्ट्रीय क्षमता और संस्थागत मजबूती को भारत की वैश्विक भूमिका से जोड़ते हुए अपने विचार रखे। वहीं राष्ट्रपति भवन के एसीपी संदीप वशिष्ठ ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और राष्ट्रीय संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

संस्थागत मजबूती और विकसित भारत पर विचार
NCLT के पूर्व सदस्य और दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार एचसी सूरी ने भारत के कानूनी और संस्थागत विकास पर चर्चा की। उन्होंने भारत को तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक परिपक्व लोकतंत्र के रूप में देखने की आवश्यकता पर विचार रखे।
भारत सरकार के महिला एवं बाल कल्याण विभाग के निदेशक डॉ. कृष्णमूर्ति ने महिलाओं और बच्चों को केंद्र में रखकर विकास योजनाओं के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने समावेशी विकास को भारत की दीर्घकालिक प्रगति के लिए आवश्यक बताया।
‘विश्व गुरु’ से ‘ग्लोबल पार्टनर’ तक भारत की यात्रा
ET Government के संपादक अनूप वर्मा ने कार्यक्रम के संवाद सत्र को आगे बढ़ाते हुए भारत की ऐतिहासिक विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं पर चर्चा की। उन्होंने भारत के ‘विश्व गुरु’ बनने की आकांक्षा, देश की प्राचीन समृद्धि और आधुनिक विकास के बीच संबंधों पर विचार-विमर्श किया।
GTTCI के इंडस्ट्रियल एक्सपोर्ट चेयरमैन डॉ. पवन कंसल ने भारतीय उद्योगों की अंतरराष्ट्रीय क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में अपनी जगह मजबूत करने की क्षमता रखती हैं और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान दे सकती हैं।
कई देशों के राजनयिक हुए शामिल
कार्यक्रम में केंद्रीय भंडार के मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश कुमार, TENEX JSC (ROSATOM) के इंडिया हेड व्लादिमीर फिनोव सहित अनेक विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। चेक गणराज्य, मिस्र, जर्मनी, निकारागुआ, रूस, सोमालिया और श्रीलंका सहित कई देशों के राजनयिक एवं प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए। UNESCO से जुड़े प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने भी कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को रेखांकित किया।
GTTCI बोर्ड के सदस्य आश्मीन मुंजाल, डॉ. गिरीश देसाई, कपिल खंडेलवाल, नवरतन अग्रवाल, डॉ. परमीत सिंह चड्ढा, सागर अग्रवाल और शुभम गुप्ता सहित अन्य सदस्य भी समारोह में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत बनाया। इसके बाद राजनयिकों, वक्ताओं और विशिष्ट अतिथियों का सम्मान किया गया। हाई टी और नेटवर्किंग सत्र के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने आपसी संपर्क और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत की।
India@80 समारोह का संदेश स्पष्ट रहा कि भारत अपनी स्वतंत्रता के आठ दशकों की उपलब्धियों को आधार बनाकर अब वैश्विक सहयोग, तकनीक, व्यापार, समावेशी विकास और नवाचार के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। कार्यक्रम ने भारत की उस तस्वीर को सामने रखा, जिसमें देश अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखते हुए दुनिया के साथ साझेदारी बढ़ाने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है।
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