Homeराज्यहिमाचलShimal News:- गंभीर आरोप सिद्ध होने पर जेबीटी शिक्षक सेवा से बर्खास्त;...

Shimal News:- गंभीर आरोप सिद्ध होने पर जेबीटी शिक्षक सेवा से बर्खास्त; विभागीय जांच में सभी आरोप साबित

विभागीय जांच में सभी आरोप साबित, निजी कारोबार, आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने और सेवा नियमों के उल्लंघन पर हुई कड़ी कार्रवाई

शिमला| हिमाचल प्रदेश के प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने सरकारी सेवा में अनुशासनहीनता, गंभीर कदाचार एवं सेवा नियमों के उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए शिक्षा खंड सराहन, जिला शिमला के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक पाठशाला रुनपू में कार्यरत जेबीटी शिक्षक कुंदन सिंह को सरकारी सेवा से बर्खास्त (Removal from Service) कर दिया है। उप निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा, शिमला द्वारा जारी अंतिम दंडादेश में नियमित विभागीय जांच के बाद लगाए गए सभी प्रमुख आरोपों को सिद्ध मानते हुए यह कठोर कार्रवाई की गई।

विभागीय आदेश के अनुसार कुंदन सिंह पर बिना अनुमति लंबे समय तक विद्यालय से अनुपस्थित रहने, सरकारी विद्यालय के अभिलेखों में अनियमितता एवं हेराफेरी करने, सरकारी सेवा में रहते हुए निजी व्यवसाय एवं ठेकेदारी करने, गिरफ्तारी एवं पुलिस रिमांड की जानकारी विभाग से छिपाने तथा अपने विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों की सूचना विभाग को न देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन सभी आरोपों की नियमित विभागीय जांच करवाई गई, जिसमें जांच अधिकारी ने उपलब्ध दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपों को सिद्ध पाया।

 

गंभीर आरोप सिद्ध होने पर जेबीटी शिक्षक सेवा से बर्खास्त; विभागीय जांच में सभी आरोप साबित
JBT teacher dismissed from service after serious allegations were proven

 

जांच के दौरान बैंक खातों की भी विस्तृत जांच की गई। विभागीय आदेश में उल्लेख किया गया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए संबंधित शिक्षक के बैंक खाते में निजी व्यावसायिक गतिविधियों के संबंध में ₹30,94,812 की राशि प्राप्त हुई। विभाग ने इसे सरकारी सेवा के दौरान निजी व्यवसाय में संलिप्तता का महत्वपूर्ण साक्ष्य माना और इसे सेवा आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन माना।

विभागीय आदेश के अनुसार संबंधित शिक्षक के विरुद्ध पूर्व में एफआईआर संख्या 51/2012, थाना झाकड़ी तथा एफआईआर संख्या 33/2013, थाना भावानगर में मामले दर्ज रहे। जांच में यह भी पाया गया कि गिरफ्तारी, पुलिस रिमांड तथा लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी विभाग को नहीं दी गई, जबकि सेवा नियमों के अनुसार इसकी सूचना देना अनिवार्य था।

जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कर्मचारी सरकारी सेवा में रहते हुए निजी व्यापारिक गतिविधियों में सक्रिय रहा। विभाग ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इसे सरकारी कर्मचारी आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन माना। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति किसी भी प्रकार का निजी व्यवसाय या व्यापारिक गतिविधि नहीं कर सकता।

Facebook:- https://www.facebook.com/share/p/1Ju9zfvReq/

शिक्षा विभाग ने आदेश में स्पष्ट किया है कि 21 नवंबर 2025 से सेवा समाप्ति की तिथि तक की निलंबन अवधि को “डाइज-नॉन (Dies-Non)” माना जाएगा। इसका अर्थ है कि इस अवधि का कोई वेतन, वार्षिक वेतनवृद्धि, पेंशन अथवा अन्य सेवा लाभ संबंधित कर्मचारी को प्राप्त नहीं होगा। साथ ही जीवन निर्वाह भत्ता तत्काल प्रभाव से बंद करने तथा संबंधित कर्मचारी का नाम सेवा अभिलेखों एवं विद्यालय की सक्रिय कर्मचारी सूची से हटाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

आदेश के अनुसार संबंधित कर्मचारी को आदेश प्राप्त होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा, हिमाचल प्रदेश के समक्ष अपील करने का अधिकार रहेगा।

गौरतलब है कि राजकीय प्राथमिक पाठशाला रुनपू लंबे समय से विवादों में रही। स्थानीय ग्रामीणों एवं अभिभावकों द्वारा शिक्षक की अनियमित उपस्थिति, शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने तथा अन्य गंभीर अनियमितताओं को लेकर लगातार शिकायतें उठाई जाती रही थीं। विभागीय जांच पूरी होने के बाद अब शिक्षा विभाग ने आरोप सिद्ध होने पर सेवा से बर्खास्त करने की कार्रवाई की है।

 

यह भी खबर पढ़े:- विश्व युवा कौशल दिवस 2026: लखनऊ में युवाओं का सम्मान

 

शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई को सरकारी सेवा में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी सेवा में नियमों की अनदेखी, निजी व्यवसाय, तथ्यों को छिपाना तथा सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments