यह कहानी सिर्फ एक #IPS_अधिकारी की नहीं है, बल्कि एक ऐसे दूरदर्शी व्यक्ति की है जिसने बिहार की माटी की खुशबू और उसके स्वर्णिम इतिहास को अपनी आत्मा में बसाया है। बिहार के बेगूसराय जिले में जन्मे विकास वैभव जी बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे और उन्होंने हमेशा से जाना कि शिक्षा ही वो शस्त्र है जिससे समाज को बदला जा सकता है। उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई बहुत साधारण माहौल में हुई, लेकिन उनके सपने हमेशा असाधारण थे। अपनी कठिन मेहनत के दम पर उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान #भारतीय_प्रौद्योगिकी_संस्थान_कानपुर से सूचना प्रौद्योगिकी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उस समय वे चाहते तो विदेश जाकर लाखों-करोड़ों का धन कमा सकते थे, लेकिन उनके दिल में हमेशा एक बात खटकती थी कि अगर सब बाहर चले जाएंगे, तो उनकी मातृभूमि को कौन बदलेगा। इसी तड़प और देश सेवा के जज्बे ने उन्हें #लोक_सेवा_आयोग की तरफ मोड़ा और वर्ष 2003 में उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में शानदार सफलता हासिल की।

विकास वैभव जी का पुलिसिंग जीवन सिर्फ एक सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि अपराध के खिलाफ एक बड़ा #धर्मयुद्ध रहा है। उनकी जहाँ भी नियुक्ति हुई, वे अपराधियों के लिए ‘काल’ बनकर उभरे। जब उनकी नियुक्ति रोहतास में हुई, तो वह पूरा क्षेत्र भयंकर नक्सलवाद की चपेट में था। कैमूर की जिन पहाड़ियों पर नक्सलियों का अधिकार था और जहाँ वर्षों से कोई अधिकारी जाने का साहस नहीं करता था, वहाँ उन्होंने अपने प्राणों की परवाह न करते हुए स्वयं खोज अभियान का नेतृत्व किया और ऐतिहासिक रोहतास किले पर तिरंगा फहराकर स्थानीय लोगों में कानून के प्रति अटूट विश्वास जगाया। इसके बाद पटना में नगर आरक्षी अधीक्षक और वरिष्ठ आरक्षी अधीक्षक के रूप में उन्होंने अपराधियों की रीढ़ ही तोड़ दी। अपहरण के मामले हों या धन उगाही, उनका नाम सुनते ही बड़े-बड़े अपराधी आत्मसमर्पण करने लगे। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी #सामुदायिक_पुलिसिंग थी, जिसके जरिए उन्होंने जनता और पुलिस के बीच की दूरी को हमेशा के लिए मिटा दिया। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी #राष्ट्रीय_अन्वेषण_अभिकरण (#NIA) में रहते हुए भी उन्होंने देशद्रोही तंत्र की कमर तोड़ी और भागलपुर सहित कई अन्य संवेदनशील जिलों में सांप्रदायिक तनाव को खत्म कर शांति का माहौल स्थापित किया।
पुलिस व्यवस्था के जरिए अपराधियों को तो सुधारा जा सकता था, लेकिन पूरे समाज को बदलने के लिए एक सकारात्मक क्रांति की आवश्यकता थी। विकास वैभव जी ने गहराई से महसूस किया कि बिहार का जो अतीत #नालंदा और #विक्रमशिला जैसी महान ज्ञान-भूमियों का रहा है, आज का युवा उस गौरव को भूलकर जातिवाद, आपसी मतभेद और हीनभावना में खो रहा है। इसी पीड़ा और गहरी सोच के साथ जन्म हुआ #लेट्स_इंस्पायर_बिहार मुहिम का। उन्होंने शिक्षा, समता और उद्यमिता को इस आंदोलन का मूल मंत्र बनाया और नारा दिया कि हमें बिहार को फिर से वही पुराना गौरव दिलाना है, और इसके लिए किसी सरकार के भरोसे बैठने के बजाय खुद आगे आना होगा। उन्होंने जाति और धर्म की दीवारों को तोड़कर युवाओं को एक मंच पर खड़ा करना शुरू कर दिया।
शुरुआत भले ही सामाजिक पटल और छोटी-छोटी बैठकों से हुई थी, लेकिन देखते ही देखते यह मुहिम एक विशाल #जन_आंदोलन बन गई। आज बिहार के कोने-कोने में इसके मजबूत #जिला_संगठन काम कर रहे हैं। इस मुहिम के अंतर्गत पटना के ऐतिहासिक बापू सभागार में विशाल #बिहार_पुनर्जागरण सम्मेलनों जैसे बड़े-बड़े कार्यक्रमों का सफल आयोजन हुआ, जहाँ हजारों युवाओं, शिक्षकों और उद्यमियों ने एक साथ आकर बिहार के विकास का संकल्प लिया। इसके जरिए मेधावी लेकिन निर्धन छात्रों के लिए निःशुल्क शिक्षा, आजीविका परामर्श और मार्गदर्शन के बेहतरीन कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, साथ ही प्रवासी बिहारियों को वापस अपनी धरती से जोड़ने के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है।
आज का सफर साक्षी है कि विकास वैभव जी सिर्फ एक पुलिस अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे लाखों युवाओं के सच्चे मार्गदर्शक और #प्रेरक बन चुके हैं। उनका पूरा जीवन हमें सिखाता है कि पद चाहे जो भी हो, अगर आपके इरादे नेक हैं और अपनी मिट्टी के प्रति ईमानदारी है, तो आप अकेले दम पर भी लाखों दिलों में बदलाव की लौ जला सकते हैं। उनका जीवन आज हर उस व्यक्ति के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है जो समाज में बदलाव देखना चाहता है।


